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मनुष्य महाबली कैसे बना

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  • Pages:248 pages
  • Edition Year:2026
  • Publisher:Anurag Trust
  • Language:Hindi
  • ISBN:978-81-89719-10-4


Book Description

आज जब मनुष्य की उत्पत्ति और मानव समाज के विकास को लेकर तमाम क़िस्म के अवैज्ञानिक और भ्रामक विचार फैलाए जा रहे हैं तब इस किताब का महत्व और उपयोगिता बहुत ज़्यादा है। यह आज से क़रीब 90 साल पहले लिखी गयी थी और तब से इस विषय में कई नयी खोजें हुई हैं लेकिन इसमें बताये गये मूल सिद्धान्तों में कोई बड़ा अन्तर नहीं आया है। इसकी सबसे बड़ी ख़ूबी है कि यह इस विषय को इतने रोचक ढंग से समझाती है कि बच्चों और किशोरों ही नहीं, हर उम्र के उत्सुक पाठकों के लिए एक ज़रूरी किताब बन जाती है।

 इस पुस्तक के विषय का सुझाव महान लेखक मक्सिम गोर्की ने दिया था। उन्होंने कहा था, “जानते हो, मैं इस तरह की किताब कैसे शुरू करता? अनन्त शून्य की कल्पना करो। नक्षत्र, नीहारिकाएँ... किसी विशाल नीहारिका की गहराई में कहीं सूरज चमकने लगता है। ग्रह सूरज से अलग हो जाते हैं। किसी छोटे-से ग्रह के धरातल पर पदार्थ सजीव हो उठता है, उसमें अपने बारे में चेतना पैदा होने लगती है। मनुष्य उत्पन्न होता है...” इस पुस्तक के लेखकों ने 1936 में अपना काम शुरू किया। उन्होंने बताया है कि मनुष्य कैसे उत्पन्न हुआ, उसने काम करना और सोचना कैसे शुरू किया, उसने आग और लोहे को अपने वश में कैसे किया, उसने प्रकृति पर अपना प्रभुत्व कैसे स्थापित किया, किस तरह उसने इस दुनिया को समझा और उसका पुनर्निर्माण किया।

जैसाकि पुस्तक की प्रस्तावना कहती है –

इस धरती पर एक महाबली रहता है। उसके हाथ भीमकाय रेलवे इंजन को उठा सकते हैं। उसके पैर हज़ारों कोस रोज़ नाप सकते हैं। उसके पंख उसे बादलों के ऊपर ले जा सकते हैं, जहाँ कोई पक्षी भी नहीं पहुँच सकता। उसके पर किसी भी मछली के परों से ज़्यादा शक्तिशाली हैं। उसकी आँखें अदृश्य चीज़ों को देख लेती हैं, उसके कान दुनिया के दूसरे छोर पर बोले गये शब्द सुन लेते हैं। वह इतना बलवान है कि पहाड़ों को आरपार छेद सकता है और झरनों को रोक सकता है। वह धरती का चेहरा बदल रहा है, जंगल उगा रहा है, समुद्रों को जोड़ रहा है, रेगिस्तानों में पानी ला रहा है।

यह महाबली कौन है? मनुष्य। लेकिन वह महाबली कैसे बना, वह धरती का राजा कैसे बना? यही इस पुस्तक की कहानी है।

बड़े आकार (7 x 9.5 इंच) के 248 रंगीन पेजों वाली 80 ग्राम शेषशायी नेचुरल शेड काग़ज़ पर छपी इस किताब की क़ीमत सिर्फ़ 425 रुपये रखी गयी है।




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M. Ilin & E. Segal

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