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साहित्‍य और कला

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  • Pages:529 pages
  • Edition Year:2006
  • Publisher:Rahul Foundation
  • Language:Hindi
  • ISBN:9788187728597


Book Description

प्रस्तुत पुस्तक कार्ल मार्क्स तथा फरेडरिक एंगेल्स की कृतियों तथा चिट्ठियों उद्धरणों और पूर्ण पाठों का संकलन है, जिनमें कला पर तथा समाज में उसके स्थान पर उनके विचार व्यक्त किये गये हैं। वैज्ञानिक कम्युनिज़्म के संस्थापकों ने इस विषय पर जो कुछ लिखा, वह सब इस पुस्तक में दे पाना असम्भव था, फिर भी यह कलात्मक सृजन के बारे में मार्क्स तथा एंगेल्स के सबसे महत्त्वपूर्ण विचारों से पाठकों को अवगत कराती है। इसे पूर्व प्रगति प्रकाशन, मास्को से मार्क्स-एंगेल्स का जो संकलन ‘साहित्य और कला’ नाम से प्रकाशित हुआ था, उसमें कुछ और महत्त्वपूर्ण लेख और उद्धरण जोड़ कर इसे अधिक संतोषजनक तथा व्यापक बनाने की कोशिश की गयी है। साथ ही, इसमें जेनी मार्क्स के कुछ दुर्लभ आलोचनात्मक लेखों को भी शामिल किया गया है। क्रिलोव की लम्बी भूमिका के साथ ही परिशिष्ट में जार्ज लुकाच का वह प्रसिद्ध निबन्ध भी है जो उन्होंने मार्क्स और एंगेल्स के सौन्दर्यशास्त्र संबंधी लेखन के एक हंगरी संस्करण की प्रस्तावना के रूप में लिखा था।




About Author

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Karl Marx

एक महान क्रान्तिकारी विचारक एवं शिक्षक

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Frederick Engels

महान क्रान्तिकारी शिक्षक एवं नेता

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